• Thu. Feb 27th, 2025

    विदेशी ताक़तें कैसे खोज रही हैं सीरिया में दख़ल करने के रास्ते

    qqq

    बीते 13 सालों के गृह युद्ध के बाद अब देश को एकजुट करने के लिए सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-श’रा अपनी सरकार के नियंत्रण को स्थापित करने की कोशिश में लगे हुए हैं.

    Also read:नीतीश कैबिनेट विस्तार जल्द शपथ लेंगे 7 मंत्री

    इस बीच, उन्हें तुर्की जैसे देशों से आने वाले राजनीतिक दबाव का भी सामना करना होगा. दबाव अमेरिकी की तरफ़ से भी होगा जो इस क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रहा है.दिसंबर 2024 में इस्लामी हथियारबंद ग्रुप हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) और उसके सहयोगियों ने सीरिया की राजधानी दमिश्क पर कब्ज़ा कर लिया था और पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को रूस भागना पड़ा था.

    Also read:तलाक पर गोविंदा का रिएक्शन, बीवी से चल रही अनबन

    इसके बाद एचटीएस के नेता अहमद अल-श’रा अंतरिम राष्ट्रपति बन गए. हालांकि, अभी तक एचटीएस का पूरे देश पर शासन स्थापित नहीं हो पाया है.सीरिया में अमेरिका के 900 सैनिक हैं और उसका कुर्द लोगों की अगुवाई वाले सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेस (एसडीएफ़) को समर्थन है. इस ग्रुप का अधिकांश नियंत्रण देश के उत्तर-पूर्व और पूर्वी हिस्से में है. इन ग्रुपों में कुर्दिश नीत पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (वाईपीजी) भी शामिल है.

    ALso read:विमान की लैंडिंग के दौरान रनवे पर आया दूसरा प्लेन

    दक्षिणी सीरिया और विभिन्न मिलिशिया समूहों की स्थिति

    कुछ अनुमानों के अनुसार, देश में एसडीएफ़ के लड़ाकों की संख्या 40 हज़ार से 60 हज़ार के बीच है, जबकि वाईपीजी में 20 हज़ार से 30 हज़ार लड़ाके हैं.दक्षिणी सीरिया में बड़ी संख्या में द्रूज़ आबादी रहती है और इस इलाक़े में साउदर्न फ़्रंट और साउदर्न ऑपरेशंस रूम जैसे मिलिशिया ग्रुप भी हैं.

    हालांकि डॉ सालेम का कहना है, “लगभग सभी द्रूज़ गांव वालों ने एचटीएस का शासन स्वीकार कर लिया है.”जब इदलिब पर एचटीएस का शासन था तो तुर्की उस इलाक़े को मदद करता था जैसे बिजली और टेलीकॉम जैसी सेवाओं मुहैया कराकर.

    जब दमिश्क पर एचटीएस ने नियंत्रण स्थापित किया तो तुर्की पहला देश था जिसने अपने प्रतिनिधि भेजे थे. इनमें तुर्की के इंटेलिजेंस चीफ़ इब्राहिम कालिन भी थे.ब्रसेल्स के एक थिंक टैंक इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के डॉ. नानार हावाश के अनुसार, सीरिया में तुर्की के दो मक़सद हैं.

    Also read:शाहरुख : सूद से मिलने वाली राशि लेने से मना कर दिया

    Share With Your Friends If you Loved it!