आज, 9 अगस्त को, देशभर में नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग मंदिर जाकर भोलेनाथ और नाग देवता की पूजा करते हैं और अपने घरों की दीवारों पर नागों की आकृति बनाकर उनकी पूजा करते हैं।
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मान्यता है कि नाग पंचमी की पूजा से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती और कालसर्प दोष का प्रभाव भी नहीं पड़ता। कई जगहों पर इस दिन गुड़िया पीटने की परंपरा भी है। आइए जानें कि नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने की परंपरा की शुरुआत कब और कैसे हुई।
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नाग पंचमी के दिन गुड़िया क्यों पीटी जाती है?
धार्मिक कथा के अनुसार, एक लड़का महादेव का भक्त था और रोजाना पूजा के लिए मंदिर जाता था। वहां उसे नियमित रूप से नाग देवता के दर्शन होते थे, जो उसके पैरों से लिपट जाते थे। एक दिन उसकी बहन ने यह देख लिया और डर के मारे नाग को पीटकर मार डाला, सोचते हुए कि कहीं वह उसके भाई को न काट ले।
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जब भाई ने बहन को पूरी बात बताई, तो वह अपनी गलती को पाप मानकर रोने लगी। उपस्थित लोगों ने कहा कि नाग देवता के रूप होते हैं, और इसलिए उसे सजा मिलनी चाहिए। चूंकि यह गलती अनजाने में हुई थी, इसलिए तभी से नाग पंचमी पर गुड़िया को पीटने की परंपरा शुरू हुई।
नाग पंचमी पूजा विधि
- नाग पंचमी के दिन नाग कुल के सभी नागों की पूजा करें।
- नाग देवता को गाय के दूध, धान का लावा, सफेद फूल, और धूप अर्पित करें।
- नाग देवता को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप करें: ‘ओम वकुल नागाय विद्महे विषदंताय धीमहि, तन्नो सर्प:प्रचोदयात्’।
- नाग देवता की मूर्ति पर तांबे के लोटे से दूध और जल चढ़ाएं।
- यदि संभव हो, तो मंदिर में चांदी के नाग-नागिन के जोड़े की पूजा और अभिषेक करें।